Author: Dinesh Gupta

July 25, 2018 / / Poem
June 20, 2018 / / Poem
June 13, 2018 / / Poem

शब्द नए चुनकर गीत वही हर बार लिखूँ मैं

उन दो आँखों में अपना सारा संसार लिखूँ मैं

विरह की वेदना लिखूँ या मिलन की झंकार लिखूँ मैं

कैसे चंद लफ्ज़ों में सारा प्यार लिखूँ मैं

June 6, 2018 / / Poem
May 30, 2018 / / Poem
May 9, 2018 / / Poem
May 2, 2018 / / Poem
April 25, 2018 / / Poem
April 18, 2018 / / Poem

हम जो होठों पर इतनी मुस्कान लिए बैठे हैं सीने में ग़मों का तूफान लिए बैठे हैं   आप जो हमसे इतना अनजान हुए बैठे हैं आप तो हमारी जान ही लिए बैठे हैं   एक वो हैं जो इश्क करके कब का मुकर गए एक हमीं हैं जो अब तक ये अहसान लिए बैठे हैं   मालूम है के टूटकर गिरेगा ख्वाब आँखों से फिर एक बार फिर भी दिल में वही अरमान लिए बैठे हैं !

April 4, 2018 / / Poem