ओ पार्टी के नेता

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ओ पार्टी के नेता, बात ये सुनता जा

हम वोट करने वाले है कोई गैर नहीं
और तुम चोट करने वाले हो कोई बैर नहीं।

जब जब आये इलेक्शन तुमने हमको पुकारा
कभी नोट से कभी खोट से शीशे में ऊतारा
चुनाव जीत जाते, पलट के नहीं आते
हम देखते रह जाते, कोई काम नहीं
अरे ओ नेता तुम यहां के इंसान नहीं।

घोटालो का दौर है जो तुमने ही चलवाया
भ्रष्टाचारियों को सबक तुमने ही पढ़ाया
पुलिया गिर जाते, करोड़ो खा जाते
बेकसूर मारे जाते, संसद मौन रही
अरे ओ नेता तुम यहां के इंसान नहीं।

कर्जा लेके लोगों को विदेश भगवाया
हिस्सा चोरी का तेरे पास भी है आया
देश हितेषी कहलाते, देश लूट के खाते
अजब मुद्दे उठवाते ,मूर्ख नाम सही
अरे ओ नेता तुम यहां के इंसान नहीं।

दंगा भड़काने में तुमने गोल्ड मेडल है पाया
हिन्दू-मुस्लिम-सीख-ईसाई आपस में लड़वाया
जो लड़ाई जीत जाते, तुम उनके हो जाते
हारे को लात मरवाते, नेता काम यही
अरे ओ नेता तुम यहां के इंसान नहीं।

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Jitendra Shivhare Written by:

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