अजनबी से कुछ सपने

Like
8

 

कोई आस नहीं कुछ खास नहीं,कोई अनदेखा अंदाज़ नहीं |

कुछ अलग सी पहचान नहीं, सर ऊँचा है पर शान नहीं |

फिर भी चलते राहों में हम, कुछ पाते हैं कुछ खोते हैं |

जो अपने ना हो पाए वो सपने ही तो होते हैं    ||1||

 

दिल से चाहा रब से मांगा, हर पल की थी फरियाद यही,

उसने जो भी मांगा तुझसे, मिल जाए सब कुछ आज यहीं |

पर हम ना कभी ये जान सके, फरियादों में हम थे ही नहीं |

तब से ही ये हालात बने, कभी हँसते हैं कभी रोते हैं |

जो अपने ना हो पाए वो सपने ही तो होते हैं    ||2||

 

फिर भी रख तू आबाद उसे, ख़ुशियों की कमी हो उसे नही |

जब गमों की बारी आए तो, मेरे दामन में डाल सभी |

हँसना तो कब का भूल चुके, अब आँसू पलकें भिगोतीं हैं |

जो अपने ना हो पाए वो सपने ही तो होते हैं    ||3|

######

Write to Author
Like
8
Written by:

Lucky enough to have been roving around since childhood,. Visiting new places and meeting new people has been my kind of favorite. Its amazing how words written simply can talk so loud. This thrill of writing got to my nerves and then CWS paved the way further.

Be First to Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *